1971 के युद्ध से पहले भारत और पाकिस्तान की तैयारी |

दोस्तों भारत और पाकिस्तान के बीच  1971 के  युद्ध के इस सीरीज में हम उस समय की हर तरह की परिस्थितियों के बारे मे एक विस्तृत चर्चा करेंगे | इस सीरीज के बारे में हमे जरूर बताए | तो चलिए शुरू करते है | जब भी हम किसी महान शासक की बात करते हैं,  तो हम यह जरूर देखते हैं कि उस शासक ने अपने कार्यकाल के दौरान कितने युद्ध जीते हैं ? युद्ध को लेकर हम लोगों ने देश के ताकतवर होने का भी अनुमान लगाना सीख लिया है | आज दुनिया में जितने भी देश हैं,  उनमें से लगभग प्रत्येक  देश ने कभी न कभी किसी न किसी युद्ध में भाग जरूर लिया है | लगभग प्रत्येक देश ने इतिहास में कोई ना कोई जंग हारी भी है | चाहे वह अमेरिका हो या चीन या फिर भारत | अब युद्ध करने की हर देश के अलग-अलग कारण हो सकते हैं, जैसे हिटलर का पोलैंड पर हमला |

 

भारत और पाकिस्तान 1971

उसके मन में यहूदियों के प्रति छुपी नफरत और अपने आप को दुनिया का सबसे ताकतवर इंसान बताने के इरादे से किया गया था | तो वहीं जापान ने चीन पर हमला अपने देश की जमीनी सीमा का विस्तार करने के लिए किया था | लेकिन भारत के संबंध में बात, कुछ अलग है |

अगर हम भारतवर्ष के गौरव पूर्ण संपूर्ण इतिहास को ध्यान से देखें , तो एक बात तो साफ हो जाता है कि भारत के शासको ने कभी भी किसी दूसरे देश पर बदनीयती से हमला नहीं किया है | इस देश में चंद्रगुप्त मौर्य जैसे महान शासक पैदा हुए हैं,  जो उस समय  दुनिया की सबसे उन्नत सैन्य ताकत रखा करते थे |  इसके बावजूद भारत के शासको ने कभी भी अपने पड़ोसी मुल्कों पर हमला करके उन पर कब्जा करने की कोशिश नहीं की थी | मगर हां, जब भी किसी दूसरे देश ने कभी भारत पर हमला करने की कोशिश की,  तो भारत ने हमेशा इस बात का मुंह तोड़ जवाब दिया है |

साल 1947 में अंग्रेजों से आजादी मिलने के बाद भी यह सिलसिला अतीत की ही जारी रहा है | अगर गौर किया जाए तो भारत के साथ पड़ोसी देश पाकिस्तान ने चार बार जंग लड़ी है | मगर एक बार भी वह अपने बदनीयत इरादों में कामयाब नहीं हो सका है |

इसमें सबसे पहली जंग आजादी के ठीक बाद साल 1947 में कश्मीर को लेकर हुई थी | उसके बाद साल 1971 की मुक्ति संग्राम अर्थात liberation war और सन 1999 की कारगिल युद्ध भी शामिल है | मगर भारत और पाकिस्तान के बीच हुए इन युद्धों में आज भी सबसे महत्त्व पूर्ण सन 1971 की जंग मानी जाती है |

इस युद्ध में जहां एक तरफ पाकिस्तान के साथ अमेरिका जैसे ताकतवर देश खड़े थे, तो वही भारत के साथ रूस जैसा मित्र देश खड़ा था | इस युद्ध ने दुनिया भर में भारत की छवि को पूरी तरह से बदल दिया था | दूसरे विश्व युद्ध के बाद,  शायद ही ऐसा कोई युद्ध हुआ होगा | जिसमें एक लाख के करीब सैनिकों ने,  किसी देश के सामने समर्पण किया हो |

आज भी साल 1971 की जंग भारत के लिए एक विशेष जंग है | क्योंकि इसके बाद पूरे एशिया में भारत का दबदबा और बढ़ गया था | साथ ही भारत का दूसरा पड़ोसी देश चीन भी उसके प्रति काफी नरम व्यवहार अपने लगा था |

मगर जानने वाली बात यह है कि आखिरकार यह युद्ध क्यों हुआ ? इस युद्ध के नतीजे क्या हुए थे ? कैसे एक सीमित बजट के बावजूद भी भारत ने पाकिस्तान के साथ-साथ अमेरिका, ब्रिटेन जैसी महाशक्तियों को भी अपने सामने घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया |

साथ ही इस युद्ध के बाद भारत और पाकिस्तान के संबंधों में क्या फर्क आया ?  वह क्या वजह थी जिसकी वजह से भारत इस युद्ध को जीतने में सफल हुआ ? कैसे उस समय  पाकिस्तान को 93000 सैनिकों के साथ भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण करना पड़ा था ? हम इस नए सीरीज में  इसी ऐतिहासिक जंग के बारे में आपको सारी जानकारी देंगे ? चलिए शुरू करते है |

साल 1971 के युद्ध को समझने के लिए हमें इससे पहले के भारत और पाकिस्तान के बारे में थोड़ी जानकारी देना जरूरी है | सन 1947 में जब भारत को आजादी मिली उसे समय  देश को बंटवारे का दर्द सहना पड़ा था | चापलूस मोहम्मद अली जिन्ना की मांग पर मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र को एक नया देश बनाने की मांग उठने लगी | इस तरह से 14 अगस्त सन 1947 को भारत के ही एक हिस्से को अलग करके,  एक नया देश पाकिस्तान बनाया गया था |  मगर पाकिस्तान के बनने के बाद भी समस्या यह थी कि भारत में मुस्लिम जनसंख्या ज्यादातर दो हिस्सों में थी |

इनमें एक पूर्वोत्तर भारत में तथा दूसरा पश्चिमी भारत था | पूर्वोत्तर भारत का मतलब है आज के समय का बांग्लादेश और पश्चिमी भारत का मतलब है,  राजस्थान गुजरात पंजाब और जम्मू कश्मीर का पश्चिमी हिस्सा जिसे आज हम सब पाकिस्तान के नाम से जानते है |  उस समय जिन्ना अपनी मांग पर इतने अड़े हुए थे कि उन्होंने इस बात पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया कि अगर किसी देश के दो हिस्से होते हैं , और वे दोनों हिस्से एक दूसरे से जमीनी तौर पर नहीं जुड़े हुए हो,  तो उन्हें संभालना कितना मुश्किल हो सकता है ? जिन्ना की जिद की वजह से भारत का विभाजन करके पाकिस्तान का अस्तित्व दुनिया के मानचित्र पर आया |

पाकिस्तान को पहचान मिलने के बाद यह देखा गया कि पश्चिमी पाकिस्तान में वह हिस्सा शामिल था जो आज के पाकिस्तान देश का हिस्सा है और पूर्वी पाकिस्तान में वह हिस्सा था जहां आज का बांग्लादेश मौजूद है | उस समय  से ही पाकिस्तान की राजनीति में पश्चिमी पाकिस्तान ज्यादा जरूरी भूमिका निभाता था जबकि पूर्वी पाकिस्तान के लोगों को इतनी ज्यादा अहमियत नहीं दी जाती थी |

उस समय पश्चिमी पाकिस्तान के लोगो द्वारा पूर्वी पाकिस्तान अर्थात आज के बांग्लादेश के लोगों को पिछड़ी जाति के लोग कहा जाता था | पश्चिमी पाकिस्तान के लोगो का मानना था कि पूर्वी पाकिस्तान के लोग सभ्य नहीं है | उसी समय पश्चिमी पाकिस्तान के द्वारा उर्दू को पाकिस्तान की  राष्ट्रभाषा बनाने का ऐलान भी कर दिया गया था | जबकि पूर्वी पाकिस्तान में मौजूद एक बहुत बड़ी आबादी बांग्ला भाषा बोलती थी | साथ ही साथ पश्चिमी पाकिस्तान में भी पंजाबी,  सिंधी और बलूचिस्तान के लोग अलग-अलग भाषाएं बोला करते थे |

इस वजह से उस समय पूरे पाकिस्तान में इस बात को लेकर काफी नाराजगी भी देखी जाती थी | साल 1970 में जब पाकिस्तान के अंदर लोकसभा चुनाव हुए , तो उस चुनाव में पूर्वी पाकिस्तान के शेख मुजीब उर रहमान जीत गए थे | मगर वह बांग्लादेश के थे | इसीलिए पश्चिमी पाकिस्तान ने उन्हें प्रधानमंत्री बनने का मौका ही नहीं दिया और यही से शुरू हुई , बांग्लादेश की आजाद होने की लड़ाई |

मगर इससे पहले कि हम पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान के बारे में और चर्चा करें | हम यह जान लेते हैं कि पाकिस्तान के अलावा भारत में उस समय परिस्थितियों कैसी थी ? भारत में उस समय इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री के तौर पर देश को संभाल रही थी |  साथ ही पाकिस्तान के साथ पहले ही दो जंग हो चुकी थी | चीन के साथ भी तब तक भारत एक जंग लड़ चुका था |

पाकिस्तान के साथ हुई जंग में भारत को जीत मिली थी | वहीं चीन के साथ हुई जंग में भारत को भारत का एक बड़ा हिस्सा गंवाना पड़ा था | उस समय इंदिरा गांधी देश में गरीबी हटाओ का नारा देकर सत्ता में आई थी | इस वजह से उनका पूरा फोकस देश की गरीबी हटाने पर था | लेकिन भारत पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान के बीच में मौजूद था | इस वजह से इन दोनों इलाकों के बीच की परेशानी से भारत भी काफी परेशान हो रहता था |

दरअसल भारत की परेशानी की एक वजह यह भी थी कि जब शेख मुजीबुर रहमान को प्रधानमंत्री नहीं बनने दिया गया,  तो उन्होंने मार्च सन 1971 में एक आजाद देश बांग्लादेश बनाने की मांग करना शुरू कर दिया था | अपने देश के टुकड़े होते हुए देख कर पाकिस्तान सरकार ने बांग्लादेश के अंदर अपनी सेना भेज दी थी | शेख मुजीबुर रहमान को गिरफ्तार करके कराची लाया गया |

इधर पाकिस्तान सुना ने बांग्लादेशी आम नागरिकों पर खुले आम अत्याचार करने शुरू कर दिए |  पाकिस्तानी सेना द्वारा हर दिन हजारों की संख्या में बांग्लादेशी आम नागरिकों को मारा जाने लगा था  | आंकड़ों की माने तो करीब 30 लाख आम नागरिकों को उस समय पाकिस्तानी सेना  ने मार दिया था | इसके साथ-साथ चार लाख महिलाओं के साथ बलात्कार भी किया गया |

जब बांग्लादेशी नागरिकों पर इतने बड़े स्तर पर पाकिस्तान सेना के द्वारा जुल्म किया जाने लगा, तो लाखों की संख्या में बांग्लादेशी नागरिक इलीगल यानी  असंवैधानिक तरीके से छुपकर सीमा  पार करके भारत में आने लगे | और इससे भारत की सुरक्षा के साथ भी समझौता होने लगा |

उस समय भारत की मौजूदा प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इन हालात को गंभीरता से लेते हुए, उस समय  के भारतीय थल सेना के कमांडर सैम मानेक शॉ को एक मीटिंग के लिए बुलाया | उन्हें पूर्वी पाकिस्तान पर हमला करके बांग्लादेश को आजाद कराने की मांग की | लेकिन तब मानेक शॉ ने इंदिरा गांधी से कहा कि बरसात के मौसम में बांग्लादेशी इलाकों में दलदल की समस्याएं बहुत ज्यादा होती हैं | इस वजह से अभी युद्ध करना ठीक नहीं होगा |

वहीं इस मौसम में पाकिस्तान सेना और चीन भारत के दूसरे तरफ के सीमा से हमला कर सकते हैं | इसलिए सैम मानेक शॉ ने इंदिरा गांधी को दिसंबर तक इंतजार करने का सुझाव दिया , क्योंकि दिसंबर में लद्दाख क्षेत्र में बर्फ बहुत ज्यादा होने के कारण चीन के भारत पर हमला करने की संभावनाएं काफी कम हो जाएगी |

हालांकि इस दौरान भारत ने अपने सैनिकों को इस ऑपरेशन की ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया था | साथ ही साथ भारतीय सेना ने मुक्ति वाहिनी को भी पाकिस्तान सेना के खिलाफ लड़ने के लिए ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया था | मुक्ति वाहिनी बांग्लादेशी क्रांतिकारियों का एक ग्रुप था , जो बांग्लादेश को पाकिस्तान से अलग करना चाहते थे | भारत अब दिसंबर के महीने का इंतजार कर रहा था | इस दौरान जंग की सारी तैयारियां पूरी हो चुकी थी |

 

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

<p>You cannot copy content of this page</p>
Scroll to Top