हमारे जीवन में गेहूं का महत्त्व क्या होता है ? इसके लिए विचार कर देखिए कि यदि इस धरती पर गेंहू नहीं होता तो क्या होता ? गेहूं के बिना हम सब अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते | दोस्तों गेहूं मानव जीवन का एक महत्त्व पूर्ण भाग है | इसके बिना जीवन की कल्पना कर पाना बहुत ही मुश्किल है | यह भोजन के साथ हमारे लिए एक औषधि के रूप में भी काम आता है | आज के इस ब्लॉग में हम गेहूं के बारे में विस्तृत तरीके से जानेंगे |
विश्व में गेहूं दूसरा सबसे ज्यादा उगाया व खाया जाने वाला अनाज है | गेहूं के फसल की खेती पूरे विश्व में होता है |मक्का के बाद दूसरा सबसे ज्यादा उत्पादित किया जाने वाला अनाज गेहूं ही है | गेहूं का अनाज कैरिऑप्सिस वर्ग का फल है | गेहूं के सूखे फल को फ्लोर मिल में पिस कर आटा बनाया जाता है और इस आटे से अनेक प्रकार के भोज्य पदार्थ बनाए जाते हैं |
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परिचय :
गेहूं प्रोटीन, खनिज, विटामिन बी तथा फाइबर का मुख्य स्रोत है, जो एक बेहतर स्वास्थ्य निर्माण के लिए बहुत आवश्यक है | गेहूं के आटे से रोटी बनाया जाता है | गेहूं के पौधे व इसके फल में बहुत से औषधि गुण पाए जाते हैं, जिनके बारे में हम आज जानेंगे, भारत देश के प्राचीन काल मे गेहूं के फल व पौधों का उपयोग अनेक प्रकार के असाध्य रोगों के इलाज के लिए प्रयोग किया जाता था , लेकिन पाश्चात्य संस्कृति व आधुनिक चिकित्सा पद्धति की वजह से गेहूं के औषधि गुणों की जानकारी आज के लोगों को नहीं है , गेहूं के औषधीय गुणों के बारे में आज के युवा पीढ़ी को कुछ भी नहीं पता है | प्रिय पाठक बंधु आज के इस ब्लॉग मे हम गेहूं व गेहूं के पौधे , हमारे स्वास्थ्य के लिए किस प्रकार लाभदायक है ? इसके बारे मे जानेंगे |
भारत में गेहूं की फसल, रवि की फसल के रूप में जाना जाता है | भारत में गेहूं की बुवाई 15 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच में की जाती है | गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए खेतों में पर्याप्त नमी होना आवश्यक है | गेहूं के लिए आवश्यक तापमान 20 डिग्री सेंटीग्रेड से 25 डिग्री सेंटीग्रेड आवश्यक है |
गेहूं की खोज:
गेहूं ट्रीटिकाम जाति का पौधा है | पुरातत्व शास्त्रियों का अनुमान है, कि आज से 12000 साल पहले पश्चिम एशिया के देश , फिर उत्तरी अफ्रीका , यूरोप व पूर्वी एशिया में गेहूं की खोज हुई | कुछ पुरातत्व शास्त्रियों के अनुसार गेहूं की खोज सबसे पहले आज से लगभग 10,000 ईसा पूर्व फ़र्टाइल क्रिनसेट में हुई जो पूर्व मध्य का क्षेत्र है, यह जॉर्डन , फिलिस्तीन , लेबनान से लेकर सीरिया , तुर्की, इराक व ईरान तक फैला हुआ है | भारत में गेहूं की खोज का श्रेय आर्य को दिया जाता है |
भारत में गेहूं के (किस्म) प्रकार :
भारत में गेहूं के अनेक प्रजातियां हैं , जिनमें से लोक-1, जीडब्ल्यू – 322, जीडब्ल्यू – 273, जीडब्ल्यू – 366, जीडब्ल्यू – 173, एमपी – 1203, आरवीडब्ल्यू – 4106, जीडब्ल्यू – 451, जीडब्ल्यू 3288, जेडब्ल्यू – 3211, जीडब्ल्यू – 3382, जेडब्ल्यू – 1358 आदि, प्रमुख किस्में लोकप्रिय हैं।
भारत की सबसे उन्नत किस्म की गेहूं “शरबती गेहूं” है | यह सबसे अधिक मध्य प्रदेश के सीहोर क्षेत्र में उगाई जाती हैं , इसका मुख्य कारण यहां की काली मिट्टी वह जलोढ़ उपजाऊ मिट्टी है , जो शरबती गेहूं के उत्पादन के लिए बहुत अधिक उपयुक्त होती है | शरबती गेहूं को “द गोल्डन ग्रेन” के नाम से भी जाना जाता है | इसके अलावा भारत में ड्यूरम, स्पेल्ट, एंम्मर, इकॉर्न और खुरासान आदि गेहूं के वर्ग हैं |
गेहूं के औषधि गुण:
पूरे विश्व में गेहूं का उपयोग भोजन के रूप में बहुतायत मात्रा में किया जाता है | भारत में गेहूं पर बहुत सारे प्रयोग अलग- अलग विकारों पर किए गए हैं , जो प्रमाणित भी हैं | प्रिय पाठक बंधुओं गेहूं के अंदर कई ऐसे मॉलिक्यूल हैं, जो हमारे शरीर में उत्पन्न होने वाले विकार को, जड़ से समाप्त करने की क्षमता रखते हैं| मेरा ऐसा मानना है कि गेहूं न केवल एक भोज्य पदार्थ है बल्कि गेहूं एक औषधि है, जिसका उपयोग हम अपने नित्य भोजन में करके लाभान्वित होते है , और शरीर में उत्पन्न होने वाले कई तरह के विकार में गेहूं और गेहूं के पौधे का सही तरीके से उपयोग करके ,उन विकारों से मुक्त हो सकते हैं | आइए गेहूं हमारे शरीर के विकार में किस तरह उपयोगी है इसके बारे में जानते हैं |
पेशाब के साथ वीर्य का जाना
वर्तमान समय में खानपान की व्यवस्था, खासकर शहर में रहने वाले लोगों का बिल्कुल अव्यवस्थित हो गया है | जिसके कारण अधिकतर लोग इस परेशानी से बहुत परेशान हैं , ऐसे लोग जिनका पेशाब के साथ वीर्य जा रहा हो उनके लिए इस रोग का रामबाण इलाज गेहूं हो सकता है | इस परेशानी से मुक्त होने के लिए हम गेहूं को निम्न प्रकार से उपयोग में लाएं, तो लगभग एक सप्ताह में इस परेशानी से मुक्त हो जाएंगे |
100 ग्राम गेहूं के दाने को रात में भिगो दें , भीगे हुए गेहूं को पत्थर के सिल पर पीसकर लस्सी बना ले, यदि उसमें स्वाद लाना चाहते हैं, तो इच्छा अनुसार थोड़ा सा शक्कर या मिश्री मिला ले , और उसे ब्रश करने के बाद पी ले | एक सप्ताह के अंदर पेशाब के साथ वीर्य जाना बंद हो जाएगा |
आमातिसार या दस्त में :
कभी-कभी खानपान में कुछ गड़बड़ी होने की वजह से हमें दस्त होने लगता है | दस्त होने पर हम गेहूं का उपयोग एक औषधि के रूप में कर सकते हैं |थोड़ा सा सौंफ पीसकर पानी में मिलाकर पानी को छान ले | छाने हुए इस सौंफ के पानी से गेहूं के आटे को गूँथे ले, और उस आटे का रोटी बनाकर खाने से दस्त में लाभ होता है | दस्त बंद हो जाता है |
पागल कुत्ते के काटने की पहचान:
कभी-कभी अकस्मात कोई कुत्ता हमें काट लेता है, और काट कर भाग जाता है, हमें यह नहीं पता चल पाता कि काटा हुआ कुत्ता पागल है या एक नॉर्मल कुत्ता , काटने वाला कुत्ता पागल है इस बात का पता हम गेहूं द्वारा लगा सकते हैं |गेहूं के आटे को पानी में गूथ ले, गूथे हुए आटे से रोटी बना ले लेकिन उसे तवे पर बिना पकाये अर्थात गुथे हुए कच्चे आटे को ही कुत्ता जहां काटा है, उस स्थान पर रखकर बांध ले | थोड़ी देर बाद उस रोटी को खोल कर किसी दूसरे कुत्ते को खाने के लिए दें, यदि दूसरा कुत्ता उस आटे को ना खाएं , तो समझ जाइए काटने वाला कुत्ता पागल है, और यदि उस रोटी को दूसरा कुत्ता खा ले ,तो यह समझे जो कुत्ता काटा है वह पागल नहीं है |
चोट लगने पर:
हर व्यक्ति के दिनचर्या अलग-अलग होती है, जिसके कारण हमें अक्सर चोट भी लगती रहती है | चोट लगने से हमें दर्द होता है| हम मेडिकल से दवा लेते हैं | दवा को खा लेते हैं , दवा का जब तक असर है ,तब तक दर्द से आराम रहता है ,किंतु जैसे ही दवा का असर समाप्त होता है , चोट लगे स्थान पर पुनः दर्द होना शुरू हो जाता है | इस प्रकार के दर्द को ठीक करने के लिए हम गेहूं का उपयोग कर सकते हैं| यदि किसी को चोट लगे , तो वह गेहूं से चोट के दर्द को समाप्त कर सकते हैं |गेहूं के अनाज को तवे परइस तरह भुने कि गेहूं जलकर राख बन जाए ,जले हुए गेहूं को अच्छे से पिस ले फिर उसमें देसी घी और गुड़ तीनों समान मात्रा में मिला ले | सुबह शाम एक एक चम्मच दो बार खाने से चोट का दर्द ठीक हो जाता है |
कमर और जोड़ों का दर्द:
कमर और जोड़ों का दर्द आज के समय में एक साधारण सी समस्या हो गई है , इस समस्या से निजात पाना है तो गेहूं का उपयोग निम्न प्रकार से करें, कमर और जोड़ों के दर्द से आराम गारंटी के साथ मिल जाएगा | इसके लिए के लिए गेहूं के दाने को तवे पर इस प्रकार भुने कि वह जल जाए| इस जले हुए गेहूं को पीसकर उसका राख बना ले | फिर उसमें शहद मिला लें , उसकी छोटी-छोटी गोलियां बना ले | इन गोलियों को चूसने से कमर और जोड़ों का दर्द ठीक हो जाएगा |
चर्म रोग:
दिन भर मेहनत करने से शरीर में पसीना निकलता है, पसीना सूख नहीं पाता है , तो शरीर के अंग पर खर्रा ,दुष्ट अकौता तथा दाद की तरह कठिन गुप्त एवं सूखे चर्म रोग हो जाते हैं | इन रोगों का इलाज हम गेहूं के द्वारा कर सकते हैं | गेहूं को तवे पर खूब अच्छी तरह से भून ले , जिससे वह राख की तरह हो जाए| फिर उसे मिक्सर में या पत्थर के सिल पर अच्छी तरह से पीस लें | उसमें शुद्ध सरसों का तेल मिला कर, प्रभावित शरीर के भाग पर लगाने से कई वर्षों पुराना असाध्य चर्म रोग एकदम से ठीक हो जाता हैं |
पेशाब में जलन:
यदि पेशाब करते समय जलन महसूस हो रहा हो, तो रात में 12 ग्राम गेहूं को 250 ग्राम पानी में भिगो दें | सुबह उसे छानकर, भीगे हुए गेहूं के पानी में मिश्री मिलाकर पीने से पेशाब की जलन दूर हो जाती है |
बांझपन या नपुंसकता:
आधा कप गेहूं को 12 घंटे तक पानी में भिगोकर रखें | 12 घंटे बाद गेहूं को पानी से अलग कर ले, फिर गेहूं को एक गीले मोटे कपड़े में बांधकर 24 घंटे रखें , जिससे गेहूं में अंकुर निकल आए | अंकुरित गेहूं को बिना पकाए ही खाएं , स्वाद के लिए गुड़ और किशमिश मिला सकते हैं | अंकुरित गेहूं में विटामिन E पर्याप्त मात्रा में होता है, जो स्वास्थ्य तथा शक्ति का भंडार हैं| यह नपुंसकता व बांझपन को दु करने में में लाभदायक होता है |
संतान उत्पत्ति के लिए 25 ग्राम अंकुरित गेहूं 3 दिन तक , फिर 3 दिन तक इतने ही अंकुरित उड़द क्रम से तीन – तीन दिनों के अंतराल पर बदलकर कुछ महीनों तक खाने से संतान उत्पत्ति में लाभदायक होता है | गेहूं के अंकुर अमृत के समान होते हैं| इसमे शरीर के शक्ति के लिए सभी विटामिन पर्याप्त मात्रा में होते हैं , जो शरीर को शक्तिशाली बनाता हैं व रोगों को दूर करता हैं |
निष्कर्ष:
गेहूं के पौधे में सर्वाधिक पोषक तत्व है | गेहूं में जीवन के लिए आवश्यक तत्व सबसे अधिक हैं | कई जांचों से यह पता चला है कि गेहूं व गेहूं के पौधे में कई ऐसे तत्व हैं , जो हमारे शरीर से बहुत मिलता जुलता है | जैसे :- गेहूं के पौधों में मैग्नीशियम अणु है जबकि हमारे रक्त में आयरन ( लौह ) है| इन्हीं सब विशेषताओं के कारण गेहूं और गेहूं के पौधे हमारे शरीर के रक्त और नाड़ियों के शोधन में बहुत ही उपयोगी हैं | गेहूं का उपयोग कैंसर जैसे असाध्य रोगों में भी किया जा रहा है, जिसका अब तक संतोषजनक परिणाम प्राप्त हुआ हैं |
प्रिय पाठक बंधुओं , गेहूं से संबंधित और बहुत सी जानकारियां हैं, जिन्हें जानने की बहुत आवश्यकता है | हम भारत संस्कृति के लोग अपने देश में ही उत्पन्न होने वाले फसलों से मिलने वाले लाभ से अनभिज्ञ हैं, जिससे अनेक प्रकार के रोगों से घिरते जा रहे हैं | यदि हम अपने प्राचीन परंपराओं का अध्ययन करें तो हमें ऐसी ही कई सारी रोचक जानकारियां प्राप्त होंगी, जिनसे हम रोगों से बच सकते है |
आप लोगों को मेरा यह लेख कैसा लगा, उपरोक्त विकारों से अगर कोई पीड़ित हो तो इनका उपयोग करके हमें जरूर बताएं कि यह प्रयोग करने से क्या होता हैं | आज हम इंटरनेट की दुनिया में हैं , हम जो किताबों से पढ़ते हैं, उसी का अध्ययन इंटरनेट पर करते हैं , जब दोनों जगह के अध्ययन में समान परिणाम मिलते हैं तो उसे हम आप तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं |
उपरोक्त प्रयोग से क्या होता हैं , यह तो मुझे पता नहीं है किंतु मुझे यह विश्वास है उपरोक्त प्रयोग यदि फायदेमंद नहीं हैं तो इनका कोई नुकसान भी नहीं है , क्योंकि गेहूं हमारे भोजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है| हम प्रतिदिन गेहूं से बने रोटी खाते हैं , जो हमें जीवित रहने के लिए ऊर्जा देती है |
यदि उसका उपयोग हम अलग तरीके से करेंगे, अलग-अलग पदार्थों में मिलाकर करेंगे, जो प्राकृतिक हैं, तो उसका कभी कोई नुकसान नहीं हो सकता है और हम इसकी प्रामाणिकता का सही से आँकलन करके और भी लोगों को जागरूक कर सकते है , छोटी – छोटी विमारियों के इलाज को लेकर बेकार के खर्च से और रासायनिक दवाइयों के उपयोग से बच सकते है |
आज के इस लेख में फिलहाल इतना ही , यदि आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं गेहूं से संबंधित और भी अधिक जानकारी है, जिनसे हम अनभिज्ञ हैं | उन जानकारियों को हम आप तक पहुंचा पाए , इसके लिए आपको हमें कमेंट करके जरूर बताए , ताकि हम ऐसे ही जानकारियों को आप तक पहुँचा सके |
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