दोस्तों आज इस सातवें भाग में हम बात करेंगे URI Attack से कुछ दिन पहले क्या हुआ था ? एक फिदाइन हमला यानी की आत्मघाती हमले की , और साथ ही साथ एक और आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा की | तो चलिए शुरू करते हैं आज का सातवाँ भाग – भारत में लगातार फिदाइन हमले यानी की आत्मघाती हमले बढ़ते जा रहे थे | आतंकियों के निशाने पर थे भारतीय सुरक्षा बल और सरकारी दफ्तर और इन हमलों में से एक और हमला था बमपोर का हमला
बमपोर को कश्मीर का केसर का शहर भी कहते हैं | क्योंकि वहां पर केसर की खेती होती है | इसी शहर से 25 जून 2016 को सी आर पी एफ के जवान फायरिंग की प्रैक्टिस कर वापस श्रीनगर लौट रहे थे | जवानों में उत्साह था | वे मिलिट्री की बस में हंसते, गाते, बजाते वापस,आ रहे थे | तभी रात के अंधेरे में छुपकर बॉर्डर क्रॉस करके आए, दो पाकिस्तानी आतंकवादियों ने सी आर पी एफ के बस पर बीच रास्ते में हमला कर दिया |
आतंकवादियों ने एक-47 से बस पर फायरिंग शुरू कर दी | बस के अंदर बैठे जवान जो हंसते, गाते अपने कैंप की तरफ जा रहे थे | उन्हें इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि उनके ऊपर ऐसा हमला होगा | वे इस हमले के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थे | आतंकवादियों ने अपनी इस कायराने हरकत से हमारे आठ जवानों को शहीद कर दिया | लेकिन वह दो कायर आतंकवादी हमारे भारतीय सेना के सामने कब तक टिक पाते | अगले ही पल हमारे भारतीय सेना के जवानों ने उन दोनों आतंकवादियों को मौत के घाट उतार दिया |
बाद में जब उन दोनों आतंकवादियों की तलाश ली गई , तो उनके पास से दो एक-47राइफल, 11 मैगजींस और ग्रेनेड्स मिले | जो कि पाकिस्तान आर्मी उपयोग करती है | इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन लश्कर ए तैयबा ने ली | अब आप सोच रहे होंगे कि ये लश्कर ए तैयबा क्या है? तो मैं आपको बताना चाहूंगा कि पाकिस्तान में सैकड़ो आतंकवादी संगठन है | इन संगठनों में लगभग 50000 से ज्यादा आतंकवादी है |
यह बात भारत सरकार नहीं कह रही है | यह बात पाकिस्तान के प्राइम मिनिस्टर इमरान खान ने खुद पूरे मीडिया के सामने स्वीकार की थी | पाकिस्तान में सैकड़ो आतंकवादी संगठन और 50000 से ज्यादा इन संगठनों में आतंकवादी है | जब वहां के प्रधानमंत्री यह कह रहे हैं कि वहां पर 50000 से ज्यादा आतंकवादी है तो आप समझ सकते हैं कि असलियत में कितने आतंकवादी होंगे ? इन्हीं आतंकी संगठनों में से एक आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा है , जिसका सरगना अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी हाफिज सईद है |
हाफिज सईद का जन्म पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में हुआ था | इसने पाकिस्तान की यूनिवर्सिटी से इस्लाम में ग्रेजुएशन किया और लाहौर के एक यूनिवर्सिटी में एक लेक्चरर के पद पर काम करने लगा | बाद में अपने मास्टर्स की पढ़ाई के लिए वह सऊदी अरब गया | जहां पर उसकी मुलाकात कुछ आतंकवादियों से हुई | उन आतंकियों से प्रभावित होकर वह वहां से अफगानिस्तान आया और आतंकवादी बनने की पूरी ट्रेनिंग लेने लगा |
ट्रेनिंग खत्म होने के बाद पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आई एस आई के साथ मिलकर उसने लश्कर ए तैयबा की स्थापना की | जिसके आतंकी कई बार हमें जख्म दे चुके हैं | जैसे 2001 में भारत के संसद भवन पर हमला, 2006 में मुंबई के ट्रेन में बम विस्फोट, 2008 में मुंबई के ताज होटल पर हमला और भी बहुत सारे हमले उसने करवाए हैं |
इन हमलों की वजह से उसे यू एन में एक अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित कर दिया गया | हालांकि चीन और पाकिस्तान ने पूरा प्रयास किया इसे बचाने का | लेकिन उसे भारत के प्रयासों के कारण बचा नहीं पाए | बाद में हाफिज सईद ने लश्कर ए तैयबा का नाम बदलकर जमात उत् दावा कर दिया | इस नए नाम के जरिए पाकिस्तान में चुनाव लड़ने और वहां के युवाओं को आतंकवादी बनाने के काम में लगा हुआ है |
इधर सेना पर लगातार हमले बढ़ते जा रहे थे | सरकार और सेना ने मिलकर एक फैसला लिया | वह फैसला था ऑपरेशन क्लीन स्वीप जिसके जरिए सारे आतंकवादियों के लिस्ट बनाई गई | उन्हें गिरफ्तार किया जाने लगा | जो आतंकवादी इस गिरफ्तारी का विरोध करता है और भारतीय सेना के ऊपर गोलियां चलाता, उनका एनकाउंटर शुरू हो गया |
सेना के इस ऑपरेशन से आतंकवादियों की टीम में खलबली मच गई | बहुत सारे आतंकवादियों ने अपने हथियार सेना के सामने डाल कर आत्मसमर्पण कर दिया | अब युवाओं द्वारा आतंकवादी बनने की प्रक्रिया भी धीमी हो गई | जिन आतंकियों को भारतीय सेना ने मारा था | उन आतंकियों में एक नाम था बुरहान वानी, जो की एक पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन हिज बुल मुजाहिद्दीन का कमांडर था | अब आप सोच रहे होंगे कि हिज बुल मुजाहिद्दीन क्या है ?
इस सीरीज के माध्यम से इसके बारे में भी मैं आपको बताऊंगा कि कौन-कौन से आतंकवादी संगठन है ? जो भारत के खिलाफ काम करते हैं | उनका मॉडल क्या है ? वह किस मॉडल पर अपना काम करते हैं ? पाकिस्तान के द्वारा इंडिया में किस तरीके से आतंकवादी हमला कराया जाता है ? और किस तरीके से बहुत सारे आतंकवादी संगठन हमारे ही देश के कुछ युवाओं को बहला फुसलाकर अपने आतंकवादी गिरोह में शामिल करते हैं ? हमारे देश पर उनके जरिए हमला करवाते हैं | इन सब के बारे में हम एक-एक करके बात करेंगे |
हिज बुल मुजाहिद्दीन का मुख्य उद्देश्य कश्मीर में तबाही मचाना और कश्मीर को भारत से आजाद करवा कर पाकिस्तान में मिलना है | इस संगठन का मुख्य सरगना सैयद सलाउद्दीन है | सैयद सलाउद्दीन का जन्म कश्मीर के बड़गांव में हुआ था | उसके बचपन का नाम युसूफ शाह था | सलाउद्दीन ग्रेजुएशन के बाद जम्मू एंड कश्मीर पुलिस में एक सब इंस्पेक्टर के पद पर काम किया | बाद में नौकरी छोड़कर मदरसे में टीचर बन गया | जहां पर वह इस्लाम के बारे में पढ़ाया करता था |
1987 में सलाउद्दीन ने जम्मू एंड कश्मीर के विधानसभा चुनाव में भाग लिया और दूसरा स्थान पाकर चुनाव हार गया | लेकिन उसे यह हार उससे बर्दाश्त नहीं हुई और उसने इस हार का बदला लेने के लिए कश्मीर में हिंसा भड़का दी | इस हिंसा में बहुत सारे मासूम लोगों की जान गई | बहुत सारी लड़कियों की इज्जत के साथ खिलवाड़ हुआ | कश्मीर में हिंसा फैलाने के जुर्म में सलाउद्दीन को हिरासत में ले लिया गया |
समय व्यतीत होता गया, सन 1989 में सलाउद्दीन को राजनीतिक कारणों से लगभग 2 साल बाद रिहा कर दिया गया | रिहा होने के कुछ दिनों बाद वह सीमा पार करके पाकिस्तान चला गया | वहाँ उसे पाकिस्तानी सेना, पाकिस्तानी सरकार और आई एस आई की मदद मिली | इन तीनों की मदद से सलाउद्दीन एक नए आतंकी संगठन हिजबूल मुजाहिद्दीन की स्थापना की | जिसका मुख्य उद्देश्य कश्मीर के युवाओं को बहला फुसला कर, उन्हे आतंकवादी बनाना, पूरी घाटी में अशान्ति फैलाना था |
सलाउद्दीन हमेशा नाबालिग लड़कों जिनकी उम्र 15 साल से कम होता था, उनको ही अपना शिकार बनाता था | उन लड़कों का ब्रेन वॉश करके अपने आतंकवादी गिरोह में शामिल करता था | क्योंकि उसे पता था कि वह कम उम्र के बच्चों का ब्रेन वॉश बहुत आसानी से कर सकता है | बड़े लड़कों को बहलाना फुसलाना इतना आसान नहीं था | इन्ही लड़कों के लिस्ट में एक नाम बुरहान वानी का था |
बुरहान वानी को मात्र 15 साल की उम्र में ब्रेनवाश करके आतंकी संगठन में शामिल कर लिया गया था | आतंकी संगठन में शामिल होने के बाद उसने कई सारे हमले को अंजाम दिया | कश्मीरी पंडितों को मारने की धमकी दी | सेना और पुलिस वालों पर भी बहुत सारे हमले को अंजाम दिया | वह अक्सर व्हाट्सएप और फेसबुक के जरिए भड़काऊ भाषण और पोस्ट को लोगों तक पहुंचाता था |
उसने अमरनाथ यात्रा पर भी हमले की साजिश रची | वह कश्मीर में आतंकियों का पोस्टर बॉय बन गया था | बहुत सारे आतंकी जो अभी ट्रेनिंग ले रहे थे, उसी की तरह बनने की कोशिश कर रहे थे | लेकिन 8 जुलाई 2016 को सुरक्षा बलों ने आखिरकार उसे भी मार गिराया |
उसके मरने के बाद कश्मीर में बहुत जगह हिंसा हुई | इमरान खान ने उसे एक शहीद बता कर उसके मौत के मुद्दे को यू एन में उठाया लेकिन यू एन सहित दुनिया के हर एक देश को पाकिस्तान की नापाक हरकतों का पता पहले से ही है | पाकिस्तान की भारत को घेरने की साजिश, यहां भी नाकाम हो गई |
दोस्तों, अभी के लिए बस इतना ही आगे की कहानी के लिए अगले भाग में मिलते है , और बात करेंगे कि क्या कश्मीर में शुरू से मिलिटेंसी यानी आतंकवाद रहा है ? क्या आतंकवाद कश्मीर में शुरू से रहा है ? या कुछ ऐसा हुआ जिसने कश्मीर में आतंकवाद की शुरुआत की ? तो मिलते हैं अगले भाग में…………….
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