दोस्तों URI Attack के इस तीसरे भाग की कहानी शुरू करते है | दीनानगर हमले में शामिल तीनों आतंकियों को मार दिया गया | पठान कोट की तरफ जा रही रेलवे ट्रैक पर लगे बमों को भी हटा दिया गया, लेकिन पठान कोट शायद अभी भी आतंकियों के जेहन में था | इसीलिए पठान कोट से खतरा अभी टला नहीं था | दीनानगर हमले के बाद पुलिस और सुरक्षा बल और भी चौकन्ने हो गए | देश में शांति का माहौल हो गया | लेकिन यह शांति ज्यादा दिन तक नहीं टिकी | जब हमारे सुरक्षा बल थोड़े से ढीले पड़े, तब आतंकी उन्हें फिर से घात लगा दिया |
30 दिसंबर 2015 दीनानगर हमले के लगभग 5 महीने बाद, ठीक उसी जगह यानी भारत पाकिस्तान सीमा गुरदास पुर से पांच आतंकी रात के अंधेरे में भारतीय सीमा में घुस जाते हैं, लगभग दो दिन तक गायब हो जाते हैं | कहां जाते हैं? किसके पास जाते हैं ? किसी को भी कुछ नहीं पता |
1 जनवरी 2016 रात के 11:30 बजे, वही पाँचों आतंकी एक इनोवा कार को रोकते हैं | उसके ड्राइवर को मार कर कार लेकर भाग जाते हैं | थोड़ी दूर जाने के बाद उनकी इनोवा कर खराब हो जाती है | लेकिन इसी समय गुरदास पुर के एस पी सलविंदर सिंह अपने दोस्त राजेश वर्मा और अपने रसोइयाँ के साथ अपनी कार में बैठकर घर जा रहे होते हैं, तभी कुछ लोग, जो भारतीय सेना की वर्दी में थे, हाथ देकर एस पी की कार को रोकने के लिए इशारा करते हैं |
एस पी भारतीय सेना की वर्दी में उन लोगों को देखकर अपनी कार रोक देते हैं | वे पाँचों आदमी वही आतंकी थे, जो सीमा पार से आए थे | उन पाँचों ने अपने ए के – 47 राइफल से गाड़ी में बैठे एस पी और उनके लोगों को डराकर, उनके हाथ पैर बांध दिए | फिर उन्हें गाड़ी के पीछे वाली सीट पर बैठाकर कर, कार लेकर वहां से निकल जाते हैं | इस बार उनका टारगेट पठानकोट का वायु सेना स्टेशन था |
जहां पर रूस से खरीदी हुई फाइटर प्लेन मिग – 21 | जिसने 71 के युद्ध में पाकिस्तान की नींद उड़ा दी थी | इस प्लेन की अद्भुत क्षमता पाकिस्तान के लिए हमेशा से एक सर दर्द रहा है | साथ ही साथ पठान कोट का यह वायु सेना स्टेशन पाकिस्तान से सिर्फ 30 किलोमीटर की दूरी पर है | भविष्य में अगर युद्ध हुआ, तो सीमा से इतनी कम दूरी पर होने की वजह से, इस वायु सेना स्टेशन से पाकिस्तान से हमला करना बहुत आसान होगा |
इन्हीं बातों का डर हमेशा पाकिस्तान को सताता रहता है | पाकिस्तान सीधे तौर पर हमसे युद्ध नहीं लड़ सकता | इसलिए वह इन आतंकवादियों की मदद से हमारे लड़ाकू विमानों और हमारे वायु सेना स्टेशन उड़ना चाहता था | इधर आतंकी गाड़ी लेकर आगे बढ़ते हैं | कुछ किलोमीटर आगे जाने के बाद, न जाने क्यों बीच रास्ते में ही एस पी और उसके रसोईयां को बिना मारे , गाड़ी से बाहर फेंक देते हैं और गाड़ी लेकर आगे बढ़ जाते हैं |
लेकिन आतंकियों के कब्जे में अभी भी एस पी का दोस्त राजेश वर्मा था | आतंकियों ने एस पी की जाइलो जैसी एडवांस आधुनिक कार पहली बार चलाई थी | इसलिए उन्हें इसका सिस्टम पता नहीं था | कुछ किलोमीटर चलने के बाद आतंकियों ने गलती से गाड़ी में लगा, पुलिस का हुटर ऑन कर दिया | हुटर बजने से आतंकी घबरा गए | उसमें से एक ने एस पी के दोस्त से पूछा कि यह कार किसकी है? तो एस पी के दोस्त ने जवाब दिया यह कार एक बड़े पुलिस ऑफिसर एस पी सलविंदर सिंह की है |
पुलिस का नाम सुनते ही आतंकी घबरा गए | उन्हें लगा कि अगर एस पी जिंदा बच गया, तो उनका मिशन फेल हो सकता है | आतंकियों ने गाड़ी को वही से मोड़कर वापस वहां आए, जहां एस पी और उनके रसोईयां को फेंका था | वह उन्हें मारना चाहते थे | लेकिन तब तक एस पी और उनका रसोईयां दोनों लोग वहां से भाग चुके थे | आतंकियों को जब एस पी और उनका रसोईयां नहीं मिले, तो आतंकियों ने वापस गाड़ी मोड़ी और अपने मिशन पठानकोट वायु सेना स्टेशन की तरफ चल दिए |
रास्ते में आतंकियों ने अपने परिवार से बात कर रहे थे और उन्हें अपने मिशन के बारे में बता रहे थे | आतंकियों ने अपने परिवार वालों को हिम्मत से काम लेने और उनसे जन्नत में मिलने का वादा करके, गाड़ी को वायु सेना स्टेशन की तरफ तेज रफ्तार में बढ़ाते गए | वायु सेना स्टेशन पहुंचने के बाद आतंकियों ने राजेश वर्मा को गाड़ी से बाहर निकाला और उससे बोला कि हम अपने टारगेट तक पहुंच गए हैं |
यहां गोली चलाकर अगर तुझे मारे, तो गोली की आवाज सुनकर भारतीय सेना चौकन्ना हो जाएगी | हमारा मिशन असफल हो सकता है | आतंकियों ने इतना कहने के बाद चाकू निकाला और राजेश वर्मा का गला रेत दिया | इसके बाद आतंकी दीवार कूद कर वायु सेना स्टेशन में दाखिल हो गए | इधर राजेश वर्मा ने अपनी शर्ट निकाली और उसे अपने गले में बंधा | इससे गले से खून निकलना कुछ काम हुआ | उसके बाद राजेश वर्मा सीधा भागते हुए एक बस्ती में पहुंचे | बस्ती में पहुंचकर राजेश वर्मा ने देखा की बस्ती में सन्नाटा पसरा हुआ है |
रात गहरी हो चुकी थी | लोग सो रहे थे | राजेश वर्मा ने मदद के लिए लोगों का दरवाजा खटखटाया | लोग राजेश वर्मा को इस हाल में देखकर डर रहे थे | दरवाजा बंद कर ले रहे थे, लेकिन कुछ लोगों की मदद से राजेश वर्मा हॉस्पिटल तक पहुंच गए | वहां उसकी जान बचाई गई | इधर वायु सेना स्टेशन के अंदर पहुंचकर आतंकियों ने ड्यूटी कर रहे , दो दस के जवानों को छुपाकर गोलियों से शहीद कर दिया
गोलियों की आवाज सुनकर सेना और गरुड़ कमांडो के जवान चौकन्ना हो गए | अब दोनों तरफ से गोलियां चलने लगी, लेकिन हमारे जवानों के पास समस्या, यह आ रही थी कि रात के अंधेरे में आतंकी कहां – कहाँ है ? और कितने है? पता नहीं चल पा रहा था | आतंकियों के पास ग्रेनेड थे | वे कभी ग्रेनेड या कभी एक-47 से हमला कर रहे थे |
उनका असली टारगेट था, मिग – 21 | दो आतंकी मिग – 21 की तरफ बढ़ने की कोशिश करने लगे, ताकि वे उसे अपने साथ लाए विस्फोटको से बर्बाद कर सके | लेकिन हमारे जवानों ने उनकी कोशिश को नाकाम कर दिया | उन्हें मौत के घाट उतार दिया | तब तक सुबह होने लगी थी , तब तक हमारे जवानों ने उनमें से तीन आतंकियों को मार कर गिरा दिया था |
सुबह के तकरीबन 11:30 बजे तक बाकी के दो आतंकवादियों को भी मार गिराया गया | लेकिन इस मुठभेड़ में हमारे दो डी एस सी के जवानों के साथ-साथ हमारा एक गरुँण कमांडो का जवान भी शहीद हो गया | आतंकवादियों को करने के बाद उनकी छानबीन की गई | उसे छानबीन से पता चला कि आतंकवादियों के पास जी पी एस सिस्टम, हैंड ग्रेनेड ,एक-47 राइफल और बहुत ढेर सारा गोला बारूद था |
जिसका इस्तेमाल वह भारत के लड़ाकू विमानों को धमाके में उड़ाने के लिए करने वाले थे | लेकिन हमारे जांबाज जवानों ने उनके इरादों को नाकाम कर दिया | छानबीन में यह पता चला कि पाँचों आतंकी पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैस ए मोहम्मद से ट्रेनिंग लेकर आए थे | जैस ए मोहम्मद जिसका सरगना मसूद अजहर है | वही मसूद अजहर जिसे आतंकियों ने हमारे एक यात्री विमान को हाईजैक करके भारत की जेल से छुड़ाया था |
वही मसूद अजहर जिसने हमें बहुत सारे जख्म दिए हैं | हम इस सीरीज में इस मसूद अजहर की कहानी भी जानेंगे | इस हमले में बहुत सारे सवाल छोड़ दिए | जैसे – आतंकवादियों ने एस पी और उसके रसोईयां को जिंदा क्यों छोड़ा ? गला काटने के बाद भी एस पी का दोस्त कैसे बचा ? एस पी का कहना था कि उन्होंने वहां से भगाने के बाद सीधा पुलिस से संपर्क किया | लेकिन पुलिस ने उनकी बात नहीं मानी | आखिर पुलिस ने एक एस पी की बात क्यों नहीं मानी ? इस पर बहुत सारी जांच टीम बैठी हुई है ? और आज भी एस पी सलविंदर सिंह के ऊपर जांच चल रही है |
दोस्तों यह था पठानकोट का हमला | अगले ब्लॉग पोस्ट में हम जानेंगे कि URI हमले के तार, इस पठानकोट हमले से कैसे जुड़े हुए हैं? किस तरीके से यह पठान कोट हमला भी URI हमले की तरफ इशारा कर रहा था कि कुछ बड़ा होने वाला है ?
इस सीरीज में हम आतंकी मसूद अजहर की पूरी कहानी भी जानेंगे कि किस तरह से आतंकियों ने उसे हमारी जेल से उसे बाहर निकला ? किस तरीके से उसने आतंकी संगठन जैस ए मोहम्मद को बनाया ? कैसे पाकिस्तान और दूसरे देशों ने उसकी मदद की ? इसके बारे में भी बात करेंगे | मिलते हैं अगले ब्लॉग पोस्ट में |